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800 वेंडर्स और 4,000 डेली हायर, ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ ने इंडियन इकोनॉमी में ऐसे दिया 215 करोड़ का योगदान


जिमी शेरगिल, दीया मिर्जा, सिद्धार्थ और आदिल हुसैन जैसे सितारों से सजी वेब सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की इन दिनों खूब चर्चा हो रही है. रियल स्टोरी पर बेस्ड ये सीरीज फाइनली 7 अगस्त 2026 को ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गई है. ये अपनी कहानी और बड़े स्तर पर की गई शूटिंग को लेकर चर्चा में है. अब इस सीरीज से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई है. 

800 से ज्यादा वेंडर्स के साथ किया काम
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेटफ्लिक्स के को-सीईओ टेड सारंडोस ने हाल ही में खुलासा किया कि इस प्रोडक्शन ने इंडियन इकोनॉमी में करीब 215 करोड़ रुपये का योगदान दिया है. इसे भारत में नेटफ्लिक्स की बड़ी प्रोडक्शंस में से एक बताया जा रहा है. 

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800 वेंडर्स और 4,000 डेली हायर, 'ऑपरेशन सफेद सागर' ने इंडियन इकोनॉमी में ऐसे दिया 215 करोड़ का योगदान

115 दिनों तक चली शूटिंग
टेड सारंडोस ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के ‘एक्सप्रेस अड्डा’ कार्यक्रम में बताया कि ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की शूटिंग के दौरान टीम ने 9 से ज्यादा शहरों में 800 से अधिक वेंडर्स के साथ काम किया. सीरीज की शूटिंग करीब 115 दिनों तक चली. इतने बड़े स्तर पर शूटिंग होने की वजह से इससे जुड़े कई स्थानीय लोगों और कारोबारियों को भी काम मिला. प्रोडक्शन के दौरान करीब 200 स्थानीय कास्ट और क्रू मेंबर्स को रोजगार दिया गया. इसके अलावा लगभग 4,000 डेली हायर भी किए गए. इस तरह सीरीज की शूटिंग का फायदा सिर्फ फिल्म और ओटीटी इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहा. 

VFX पर खर्च हुए 49 करोड़ रुपये 
‘ऑपरेशन सफेद सागर’ में बड़े स्तर पर VFX का इस्तेमाल किया गया है. टेड सारंडोस के मुताबिक, सीरीज के प्रोडक्शन में करीब 49 करोड़ रुपये VFX पर खर्च किए गए हैं. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सीरीज के विजुअल्स को तैयार करने पर काफी काम किया गया है.

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क्या है ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ की कहानी?
‘ऑपरेशन सफेद सागर’ कारगिल युद्ध पर आधारित सीरीज है, जिसमें इस युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना की भूमिका को दिखाया जाएगा. कहानी में उस समय वायुसेना के सामने आई चुनौतियों और उसके अहम योगदान को पर्दे पर दिखाने की कोशिश की गई है. इस सीरीज की शूटिंग कई रियल लोकेशंस पर की गई है. इसके कुछ हिस्सों को भारतीय वायुसेना के ऑपरेशनल बेस और हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में शूट किया गया है. ऐसे लोकेशंस पर शूटिंग से कहानी को ज्यादा रियल तरीके से दिखाने में मदद मिलेगी.

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